राजस्थान राज्य के माध्यमिक स्तर के दिव्यांग विद्यार्थियों की आत्मसन्तुष्टि एवं समायोजन का अध्ययन

हम इस सत्य से भलीभाँति परिचित हैं कि प्रत्येक दिव्यांग विद्यार्थी को सभी सुविधाएंे यथा भौतिक, आर्थिक, समाजिक, पारिवारिक, विद्यालयी एवं वातावरणीय नहीं मिल पाती। हाँलाकि हमारा सरकारी तंत्र कई योजनाओं, सरकारी व गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से इन्हें सुविधाएँ मुहैया करवा रहा हैं किंतु फिर भी प्रत्येक ...

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उच्च माध्यमिक विद्यार्थियों के पारिवारिक वातावरण का  यौन शिक्षा जागरूकता स्तर पर प्रभाव का अध्ययन

प्रस्तुत शोध कार्य का मुख्य लक्ष्य उच्च माध्यमिक विद्यार्थियों के पारिवारिक वातावरण का यौन शिक्षा जागरूकता स्तर पर प्रभाव का अध्ययन करना था। शोधार्थी ने अपने शोधकार्य के लिए कुल 400 उच्च माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों को लिया गया । जिसमें 200 विद्यार्थी राजकीय विद्यालय के और 200 विद्यार्थी निजी ...

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विद्यार्थियों में यौन शिक्षा जागरूकता का अध्ययन

यौन शिक्षा का ज्ञान उतना ही जरूरी है, जितना कि दूसरे विषयों का ज्ञान होना जरूरी है। हमारे देश में काॅलेज तक में सेक्स एजुकेशन के बारे में नहीं बताया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सेक्स एजुकेशन से जुड़ी भ्रान्तियाँ, सेक्स संबंन्धी अन्धविश्वास और इससे जुड़ी कई समस्याऐं उत्पन्न होती है। परम्परागत रूप से ...

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कोटा विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रशिक्षणार्थीयों में मानवाधिकारो के प्रति जागरूकता का अध्ययन

मानव को मानव बनाया शिक्षा ने परंतु शिक्षा एक मानव का अधिकार है। जिसे सिखाते वह समझाने का कार्य अगर किसी ने किया है, तो वह शिक्षक ही हो सकता है शिक्षक के बिना व्यक्ति का मार्गदर्शन नहीं हो सकता है। शिक्षक को यदि मानवाधिकार की शिक्षा से पूर्व में ही प्रशिक्षित कर दिया जाए तो वह भावी पीढ़ी को अधिकारों ...

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राजस्थान राज्य के बांरा जिले की सहरिया जनजाति की औपचारिक शिक्षा के प्रति जागरुकता एवं समस्याओं का अध्ययन

जनजातीय समाज की शिक्षा की दृष्टि से काफी दयनीय है। भारतीय संविधान में कई प्रकार के औपचारिक शिक्षा के लिए उपबन्ध निर्धारित किए है किन्तु जनजातीय समाज इनसे अनभिज्ञ है। जनजातीय समाज को जागरूकता की अत्यन्त आवश्यकता है। जिससे की वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सके। शिक्षा की दृष्टि से पिछड़े वर्गो को ...

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भारतीय प्राचीन दर्शन में निहित शैक्षिक तत्वों की वर्तमान शिक्षा  प्रणाली में प्रासंगिकता

शिक्षा का दर्शन शिक्षा सम्बन्धी अनेक प्रश्नों का उत्तर खोजता है। इस सम्बन्ध में डाॅ. एस.एस. माथुर का कथन समीचीन है कि ‘‘शिक्षा का दर्शन, शिक्षा सम्बन्धी समस्याओं का दर्शन की दृष्टि से विवेचन करता है।‘‘ शिक्षा-दर्शन प्रायः जीवन दर्शन होता है। जीवन दर्शन और शिक्षा दर्शन के मध्य कोई पार्थक्य नहीं किया ...

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वैदिक कालीन शिक्षा प्रणाली की वर्तमान शिक्षक शिक्षा प्रणाली में प्रासंगिकता

‘‘शिक्षा मनुष्य को न केवल संस्कारवान बनाती है। बल्कि व्यक्ति में सामाजिक गुणों का विकास करती है।‘‘ यह विचारधारा पौराणिक काल (वैदिक काल) से चली आ रही है। हमारे विचारों में हम जो आज हमारे आस-पास के वातावरण को देखते है तथा प्रौद्योगिकी एवं नवीन आविष्कारों से स्वयं को प्रभावित मानते है वह आज के ज्ञान ...

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भूजल संचयन पुनर्भरण एवं प्रबंधन

इस समस्या से निपटने के लिए जल प्रबंधन के साथ-साथ भूजल संचयन एवं पुर्नभरण पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। भूजल संचयन एवं पुर्नभरण के लिए क्षेत्र के अनुरूप प्राकृतिक अथवा कृत्रिम तकनीकों को अपनाया जा सकता है। कृषि क्षेत्र, आवासीय क्षेत्र एवं छोटे औद्योगिक क्षेत्र में भी जल प्रबंधन के लिए ...

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शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों की शिक्षण दक्षता का विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि, अभिप्रेरणा तथा सृजनात्मकता पर प्रभाव का अध्ययन

प्रस्तुत शोध में शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों की शिक्षण दक्षता का विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि, अभिप्रेरणा तथा सृजनात्मकता पर प्रभाव का अध्ययन किया है। जिसमें शोधार्थी को प्राप्त हुआ कि सहशिक्षा शिक्षा शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थानों तथा महिला शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थानों दोनों में ...

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भारत के आर्थिक विकास में बैंकों की भूमिका

परिवर्तन एवं विकास विश्व की सार्वभौमिक प्रक्रिया है। आज विश्व के प्रायः सभी विकासशील देश आर्थिक नियोजन के आधार पर अपना विकास करने का प्रयत्न कर रहे हैं आर्थिक नियोजन के कार्यक्रमों को पूरा करने के लिये विशाल पूंजी की आवश्यकता होती है।वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये हमें बैंकों पर निर्भर होना ...

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