हाड़ौती अंचल के बाल साहित्यकारों का बाल साहित्य- हाड़ौती की लेखिका श्यामा शर्मा की कृतियों में सामाजिक चेतना

श्यामा शर्मा - जन्म स्थान करवाड़, जिला कोटा। बचपन में ही पिताजी स्वर्गवासी हो गए। नाना-मामा के यहाँ बड़ा ही अभावग्रस्त बचपन बीता। दसवीं क्लास में पढ़ते हुए ही जितेन्द्र निर्मोही जी से विवाह हो गया जो आज कोटा एवं राजस्थान ही नहीं अपितु राष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात सम्मानीय कवि एवं लेखक हैं।

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An Appraisal of Women’s Property Rights in India

The implementation of the 2005 Act stays a difficult inquiry. Crusade for Legal Literacy; endeavours to raise social familiarity with the advantages to the entire family if women possess property, and legal and social help for women guaranteeing their rights are only a couple of the many advances ...

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Property Rights of Women under Indian Legal System

The preamble is shown as the motivation behind the amended Acts is to expel oppression daughters revered in Mitakshara coparcenary and along these lines destroy the duplex arrangement of dowry by positive measures, consequently improving the status of women in human culture. It is important to get ...

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कोटा के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित राजकीय एवं गैर राजकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की व्यावसायिक संतुष्टि एवं प्रभावकता का तुलनात्मक अध्ययन

प्रस्तुत शोध में राजकीय एवं गैर राजकीय विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों की व्यावसायिक संतुष्टि एवं प्रभावकता का तुलनात्मक अध्ययन किया हैं जिसमें शोधार्थी को निष्कर्ष प्राप्त हुए है कि राजकीय विद्यालय के शिक्षक शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्र में गैर राजकीय विद्यालय के शिक्षकों से अधिक संतुष्ट पाए गए ...

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राजस्थान के प्रमुख सम्भागों के माध्यमिक स्तर के दिव्यांग छात्र-छात्राओं की आत्मसन्तुष्टि एवं समायोजन का विश्लेषणात्मक अध्ययन

यह कहा जा सकता है कि प्रस्तुत अध्ययन में शोधकर्ता ने राजस्थान राज्य के माध्यमिक स्तर के दिव्यांग विद्यार्थियों की आत्मसन्तुष्टि एवं समायोजन का अध्ययन” विषय पर शोेध कार्य किया हैं। इसमंे अध्ययन का स्वरूप छोटा होने के कारण यह आवश्यक नहीं हैं कि परिणाम बिल्कुल खरे उतरे। फिर भी शोधकर्ता यह आशा करता हैं ...

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शिक्षक प्रशिक्षणार्थीयों में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता

वैदिककालीन शिक्षा पद्धति से लेकर वर्तमान शिक्षा पद्धति में काफी परिवर्तन हो गया है। वर्तमान समय में विद्यार्थी विभिन्न उपाधियाँ ;क्पहतममेद्ध तो प्राप्त कर रहे है, परन्तु वास्तव में आज भी विद्यार्थी शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है। एक व्यक्ति को अधिकार प्राप्त है, किन्तु वह अपने ...

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सहरिया जनजाति की औपचारिक शिक्षा के प्रति जागरुकता

सहरिया जनजाति की औपचारिक शिक्षा क प्रति जागरूकता एवं समस्याआंे का अध्ययन’’ विषय पर गहन अध्ययन किया गया। सहरिया जनजाति औपचारिक शिक्षा के प्रति जागरूक है। यह जनजाति विद्यालयी शिक्षा से जुड़ना चाहती है। इन्हैं अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध करवाकर शिक्षा से जोड़ा जा सकता है।

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