तुलसीदास जी के साहित्य में निहित सामाजिक जीवन मूल्य

शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और जीवन मूल्यों का विकास भी है। साहित्य जो मानवीय संवेदनाओं, नैतिकता और समाज के यथार्थ का प्रतिबिंब करता है, शिक्षा के माध्यम से जीवन मूल्यों को आत्म-सात करने का एक प्रभावी साधन है। शिक्षा के द्वारा ही एक मानव सामाजिक एवं ...

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तुलसीदास जी के साहित्य का शिक्षा में अनुप्रयोग

आधुनिक शिक्षा और जीवन में भी तुलसी साहित्य के गुरू - शिष्य परम्परा और नैतिक मूल्यों को अपनाया जा रहा है। आज के समय में भी राम जैसे आदर्श चरित्र से प्रेरणा लेकर नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है। तुलसी साहित्य में शिष्य का स्वरूप गुरू के प्रति समर्पण, आदर्श आचरण और लोक कल्याण के ...

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समावेशी शिक्षा: विकलांग बच्चों की मुख्यधारा में भागीदारी

यह लेख समावेशी शिक्षा को अधिकार-आधारित और समानता-समर्थ दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य विकलांग बच्चों की मुख्यधारा में अर्थपूर्ण, सम्मानजनक भागीदारी सुनिश्चित करना है। अंतःक्रियात्मक परिप्रेक्ष्य के अनुसार बाधाएँ प्रायः पाठ्यचर्या, अध्यापन, मूल्यांकन, रवैये और अवसंरचना में ...

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उच्च शिक्षा में डिजिटल साक्षरता दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए चुनौतियाँ

आज के तकनीकी युग में डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) उच्च शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। यह केवल कंप्यूटर या इंटरनेट उपयोग की क्षमता नहीं है, बल्कि डिजिटल माध्यमों से जानकारी प्राप्त करने, उसका विश्लेषण करने, सृजन करने और साझा करने की दक्षता है। यह आत्मनिर्भरता, सहभागिता और सामाजिक ...

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