वैदिक कालीन शिक्षा प्रणाली की वर्तमान शिक्षक शिक्षा प्रणाली में प्रासंगिकता

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Author Name :- Anil Soni,,

Journal type:- IJCRI-International journal of Creative Research & Innovation

Research Field Area :-  Department of Education ; Volume 6, Issue 1, No. of Pages: 5 

Your Research Paper Id :- 2021010116

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Abstraction :-

‘‘शिक्षा मनुष्य को न केवल संस्कारवान बनाती है। बल्कि व्यक्ति में सामाजिक गुणों का विकास करती है।‘‘ यह विचारधारा पौराणिक काल (वैदिक काल) से चली आ रही है। हमारे विचारों में हम जो आज हमारे आस-पास के वातावरण को देखते है तथा प्रौद्योगिकी एवं नवीन आविष्कारों से स्वयं को प्रभावित मानते है वह आज के ज्ञान का नया स्वरूप है। लेकिन वास्तव में हमे इसके नियमानुसार उपयोग के लिए वैदिक जीवन शैली को अपनाना होगा। क्योंकि ज्योतिष विज्ञान, खगौल विज्ञान, भूगोल विज्ञान, में होने वाली घटनाओं का परम्परागत विधियों से निर्णय व निदान वैदिक शिक्षा में उपलब्ध है। अतः निष्कर्ष रूप में हम यह कह सकते है कि वर्तमान शिक्षा के स्वरूप को वैदिक शिक्षा के नियमों के अनुसार स्वीकार किया जाना चाहिए, क्यांेकि इसका स्वरूप हमारी शिक्षा पद्धति व इसके महत्व को बनाये रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Keywords :- 

वैदिक कालीन, शिक्षा प्रणाली, शिक्षक , सामाजिक, जीवन शैली

References :-

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5. पारीक मथुरेश्वर - ‘‘उदीयमान भारतीय समाज और शिक्षा‘‘

6. पाण्डेय रामशकल - ‘‘भारत में शिक्षा व्यवस्था का विकास‘‘

7. शर्मा रजनी - ‘‘समकालीन भारत और शिक्षा‘‘

8. शर्मा आर.के. - ‘‘शिक्षा के उद्देश्य ज्ञान एवं पाठ्यचर्या‘‘

9. त्यागी गुरूसरन दास- ‘‘भारतीय शिक्षा का इतिहास एवं विकास डी.ई. आई. दयालबाग आगरा।