माखनलाल चतुर्वेदी और बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ की आदर्शवादी विचारधारा

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Author Name :- Dr. Sapna Bansal,,

Journal type:- IJCRI-International journal of Creative Research & Innovation

Research Field Area :-  Department of Hindi ; Volume 4, Issue 3, No. of Pages: 10 

Your Research Paper Id :- 2019030128

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Abstraction :-

साहित्यकार अपने युग का प्रतिनिधि होता है। अपने युग का प्रतिनिधि होने के नाते उसका कत्र्तव्य हो जाता है कि अपने साहित्य द्वारा लोगों को आदर्श भावनाओं की ओर प्रेरित करे। साहित्य में इस तरह की कल्याणपरक भावना साहित्य की एक व्युत्पत्तिपरक परिभाषा में ही छिपी है जिसके अनुसार जनहित की कामना करने वाली रचना साहित्य नाम से अभिहित की जाती है। संस्कृत मंे इसी बात को इस प्रकार कहा गया है, फ्सहितस्य भावः साहित्यम्।य् ‘सहित’ के दो अर्थ होते हैं-एक के अनुसार जो हितकारी हो, दूसरे के अनुसार जो एक साथ हो। साहित्य का माध्यम भाषा होती है और भाषा मानव जाति को आपस में आब( कर उसमें सहकारिता का भाव उत्पन्न करती है। इसलिए भाषा के माध्यम से व्यक्त होने वाला साहित्य भी पारस्परिक सहयोग के भाव को और अध्कि बढ़ाने वाला होता है। साहित्य की इस परिभाषा की कसौटी साहित्य में सत्य, शिव और सुन्दर इन तीनों का समावेश हो जाता है। इन तीनों तत्त्वों के सन्तुलित समन्वय से साहित्य सुन्दर आकर्षक एवं परोपकारी भावों से ओतप्रोत हो जाता है। इन तीनों में से साहित्य का शिव रूप आदर्श भावनाओं से अनुप्राणित होता है। साहित्य में इसीलिए आदर्शवाद का अस्तित्त्व बहुत प्राचीन है।

Keywords :- 

साहित्यकार,युग,साहित्य,जनहित,आदर्शवाद

References :-

1 प्रभाः संचा, कालूराम गंगराडे, खण्डवा, 1 अप्रैल 1923, पृú 271
2 हिमकिरोटिनी, माखनलाल चतुर्वेदी, पृú 93
3 माता, माखनलाल चतुर्वेदी, पृú 56
4 भारतीय राष्ट्रवाद के विकास की हिन्दी साहित्य में अभिव्यक्ति: सुषमा नारायण, पृú 63
5 हिमकिरीटिनी, माखनलाल चतुर्वेदी, पृú 50
6 माता, माखनलाल चतुर्वेदी, पृú 56
7 साहित्य-देवता, पृú 75
8 साहित्य-देवता, पृú 75
9 बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’: व्यक्ति एवं काव्य: लक्ष्मी नारायण दुबे: पृú 290 से उदध्ृत
10 बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’: व्यक्ति एवं काव्य: लक्ष्मी नारायण दुबे: पृú 290 से उदध्ृत
11 आध्ुनिक हिन्दी कवियों के काव्य सि(ान्त: सुरेश चन्द्र गुप्त, पृú 307
12 कुंकम, नवीन, पृú 10
13 ऊर्मिला, ;पंचमसर्गद्ध, नवीन, पृú 45
14 बालकृष्ण शर्मा नवीन काव्य-रचनावली, नरेश चन्द्र चतुर्वेदी, पृú 139
15 बालकृष्ण शर्मा नवीन काव्य-रचनावली: नरेश चन्द्र चतुर्वेदी, पृú 139, 140
16 वही, पृú 140
17 बालकृष्ण शर्मा नवीन काव्य-रचनावली, भाग एक: नरेश चन्द्र चतुर्वेदी, पृú 141, 142
18 बाल कृष्ण शर्मा नवीन काव्य-रचनावली, भाग एक: नरेश चन्द्र चतुर्वेदी, पृú 142, 143
19साहित्य-देवता, पृú 50
20 वही, पृú 49, 50
21 साहित्य-देवता, पृú 51