भारत के आर्थिक विकास में बैंकों की भूमिका

SaveSavedRemoved 3

Author Name :- Jitendra Pamecha,,

Journal type:- IJCRI-International journal of Creative Research & Innovation

Research Field Area :-  Commerce and Management ; Volume 5, Issue 11, No. of Pages: 6 

Your Research Paper Id :- 2020100330

Download Published File :-  Click here

Abstraction :-

परिवर्तन एवं विकास विश्व की सार्वभौमिक प्रक्रिया है। आज विश्व के प्रायः सभी विकासशील देश आर्थिक नियोजन के आधार पर अपना विकास करने का प्रयत्न कर रहे हैं आर्थिक नियोजन के कार्यक्रमों को पूरा करने के लिये विशाल पूंजी की आवश्यकता होती है।वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये हमें बैंकों पर निर्भर होना पड़ता है। सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक सुरक्षा सम्बन्धी उपक्रम है जिस पर व्यक्ति भरोसा कर सकता है भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भारतीय बैंकिंग उद्योग में कुछ अग्रिमों का लगभग 2 तिहाई हिस्सा है।सार्वजनिक बैंकों में सरकार की 51ः से अधिक इक्विटी हिस्सेदारी हैए सभी बैंक के प्रमुख कार्य जमा के रूप में धनराशि स्वीकार करनाएधन उधार देना एमांग पर वापस निकलने की सुविधा देना हैं। बैंकों का मुख्य उद्देश्य लोगों तक सेवाओं को पहुँचाना और उनके एवं देश के आर्थिक विकास में योगदान देना है। जिससे पूर्ण रूप से देश का आर्थिक विकास किया जा सके।

Keywords :- 

भारत, आर्थिक विकास , बैंकों

References :-

1.B.L.OJHA 2019 भारतीय बैंकिंग प्रणाली RBD PUBLICATION JAIPUR
2.B.L.OJHA 2019 बैंकिंग विधि एव व्यवहार RBD PUBLICATION JAIPUR
3.Bhattacharya, K M., and Agarwal, O.P. (2006). Basics of Banking and Finance, Himalaya Publishing House First Edition, Mumbai.
4.Joshy, V., and Little, J.M.D. (1998). India's Economic Reforms: 1991-2001, Oxford University Press, New Delhi.
5.www.indianeconomic.com.
6. Different magazine and Journal

 

edusanchar.com
Logo