edusanchar Article Tracking Status

[vc_row equal_height=”yes”][vc_column][vc_empty_space height=”40px”][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”2/3″][vc_custom_heading text=”Track Your Paper Status Here…” font_container=”tag:div|font_size:27|text_align:center|color:%23ffffff|line_height:2″ google_fonts=”font_family:Vollkorn%3Aregular%2Citalic%2C700%2C700italic|font_style:400%20regular%3A400%3Anormal” css=”.vc_custom_1553251220561{background-color: #b6252b !important;border-radius: 1px !important;}”][vc_column_text bordered=”1″]

 
[/vc_column_text][vc_column_text]

‘‘शिक्षा मनुष्य को न केवल संस्कारवान बनाती है। बल्कि व्यक्ति में सामाजिक गुणों का विकास करती है।‘‘ यह विचारधारा पौराणिक काल (वैदिक काल) से चली आ रही है। हमारे विचारों में हम जो आज हमारे आस-पास के वातावरण को देखते है तथा प्रौद्योगिकी एवं नवीन आविष्कारों से स्वयं को प्रभावित मानते है वह आज के ज्ञान का नया स्वरूप है। लेकिन वास्तव में हमे इसके नियमानुसार उपयोग के लिए वैदिक जीवन शैली को अपनाना होगा। क्योंकि ज्योतिष विज्ञान, खगौल विज्ञान, भूगोल विज्ञान, में होने वाली घटनाओं का परम्परागत विधियों से निर्णय व निदान वैदिक शिक्षा में उपलब्ध है।
अतः निष्कर्ष रूप में हम यह कह सकते है कि वर्तमान शिक्षा के स्वरूप को वैदिक शिक्षा के नियमों के अनुसार स्वीकार किया जाना चाहिए, क्यांेकि इसका स्वरूप हमारी शिक्षा पद्धति व इसके महत्व को बनाये रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Your Details and Tracking Status of Your Paper/Article
[/vc_column_text][vc_empty_space height=”10px”][/vc_column][vc_column width=”1/3″][vc_empty_space][vc_widget_sidebar sidebar_id=”sidebar-1″][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][/vc_column][/vc_row]